सुभाष चन्द्र बोस जयंती 2022 | Short and Long Essay on Subhash Chandra Bose

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सुभाष चंद्र बोस के जन्मदिन के अवसर पर हम आज उनके क्रांतिकारी जीवन के बारे में इस ब्लॉग पोस्ट में बताएंगे।इस ब्लॉग में हम उनके बचपन के सभी कहानियों से लेकर एक क्रांतिकारी बनाने तक की सभी कहानियों और संघर्षों के बारे में बताएंगे।

सुभाष चंद्र बोस का जीवन अन्य क्रांतिकारीयो से एक दम भिन्न था। आखिर क्यों सुभाष चंद्र बोस को एक क्रांतिकारी का रूप लेना पड़ा? सुभाष चंद्र बोस के सपनो वाला भारत कैसा दिखता है? सुभाष जी का जन्म कहा और कब हुआ ? सुभाष चंद्र बोस जी के मृत्यु के रहस्य क्या है? सुभाष चंद्र बोस के जीवन की सभी सपनो सभी कहानियों को और आपके सभी प्रश्नों के जवाब आज मिल जायेंगे।

सुभाष चंद्र बोस से जुड़े तथ्य

जन्मतिथि: 23 जनवरी 1897
जन्मस्थान: बंगाल प्रान्त के उड़ीसा प्रभाग के कटक शहर में

मृत्यु: 18 अगस्त 1945

धर्म: हिन्दू

शिक्षा: कलकत्ता यूनिवर्सिटी

प्रसिद्धि: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग

नागरिकता: भारतीय

माता: पार्वती देवी

पिता: जानकी नाथ बोस

पत्नी: एमिली शेंकल

बेटी: अनीता बोस पॉफ्फ

सुभाष चंद्र बोस का नाम बड़े ही सम्मान से एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में लिया जाता है।ऐसा कहा जाता है की सुभाष चंद्र बोस जी जैसे लोग मानवता के आइना होते है।जो देश को उसकी आर्थिक स्थिति समझते है और आपने जैसे और लोगो को भी जागरूक करते है जो देश का मान सम्मान पूरी दुनिया में बढ़ा दे।

भारत तो हमेशा से ही वीरों की भूमि रही है। भारत ने चाणक्य , आर्य भट्ट,बुद्ध , गांधी ,भगत सिंह, सुभाष जी जैसे अन्य वीरो को जन्म दिया है। भारत में आज भी सुभाष चंद्र जी जैसे वीर है जो देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने को तैयार है। भारत की संस्कृति के वजह से आज भी भारत के लोग बहती नदियों को मां कहते है। पेड़ो को अपना देवता मानते है। यह दर्शाता है की भारत के लोग उन वस्तुओ को अपना भगवान मानते है तो सभी के जीवन के लिए आवश्यक होती है।

प्रारंभिक जीवन (NETA JI SHUBHASH CHAND BOSE)

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 में था। सुभाष जी का जन्मस्थल उड़ीसा के कटक शहर था। उनके पिता का नाम जानकी नाथ बोस था। सुभाष जी के पेशे से एक वकील थे। उनकी माता का नाम प्रभावती देवी सती था। सुभाष जी की माता एक धार्मिक महिला थीं। प्रभावती और जानकी नाथ की 14 बच्चे थे। सुभाष उनमें से नवें स्थान पर थे। सुभाष जी बचपन से ही पढ़ने में एक होनहार छात्र थे। सुभाष दसवीं की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया और स्नातक में भी प्रथम आए। कलकत्ता के स्कॉटिश चर्च कॉलेज से उन्होंने दर्शनशास्त्र में स्तानक की डिग्री प्राप्त की थी। उस दौरान सेना में भर्ती हो रही थी परंतु सुभाष जी की आंखे खराब होने के कारण उन्हें बाहर कर दिया गया। वर्ष 1919 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा की तैयारी के लिए इंग्लैंड पढ़ने गए थे।

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सुभाष चंद्र बोस का बचपन (CHILDHOOD OF NETA JI)

सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही दयालु व्यक्ति रहे है। उनके रगो में बचपन से ही एक क्रांतिकारी और दयालु व्यक्ति की तरह खून दोरता था। सुभाष जी ने अपने बचपन में ऐसे कार्य किए है जिसे आप सुनकर भावुक हो जायेंगे।

सुभाष चंद्र बोस जी के घर के सामने एक गरीब भीखरन रहती थी। उस गरीब लाचार औरत को देख कर सुभाष जी का दिल दहल उठता था।वो उस बूढ़ी और की दशा देख कर परेशान रहते थे। उस बूढ़ी औरत के पास जीने का कोई सहारा नहीं था। सुभाष जी इस अत्याचार को देख नही पाए और उन्होंने उपाय निकल लिया। सुभाष जी को स्कूल जाने के लिए घर से किराए का पैसा मिलता था तो वो उस पैसे को गरीब औरत को दे देते थे और खुद पैदल स्कूल जाने लगे।
सुभाष चंद्र जी की मां उन्हें स्कूल जाते वक्त भोजन देती थी। स्कूल के पास एक गरीब औरत थी जो खुद के खाने की व्यावथा नही कर पाती थी। सुभाष जी को ये देख कर दया आ गई और उसके बाद हमें सुभाष जी अपने भोजन में से आठ भोजन उस औरत को देने लगे। एक बार वो औरत बहुत बीमार हो गई थी तो सुभाष जी एक दो हफ्ते तक उस औरत की सेवा करते रहे जबतक वो औरत ठीक नही हो गई।

सुभाष चंद्र बोस बचपन में भूतो से डरते थे।

सुभाष चंद्र बोस के पिता वकील थे और सुभाष जी की माता घर के कार्य काज में दिन भर लगी रहती थी। इस कारण से वो अपने बच्चो पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते थे। इन्ही कारणों के वजह से सुभाष जी का पालन घर के नोकरी और रशोइये द्वारा की जाती थी। एक पुस्तक “सुभाष की कहानियां” में इन बातो को लिखा गया है।

इस पुस्तक में लिखा गया है कि सुभाष जी के घर के आस पास पेड़ पौधे अधिक मात्रा में थे। जब उनके घर में काम करने वाले लोग उन्हें खेलते थे तो सुभाष जी को उन पेड़ो से जुड़ी मन गडंत कहानियां सुनाते थे।सुभाष जी यह सुनकर डरते थे। कभी कभी उनका रशिया अपने हाथ पर नकली जख्म बना कर सुभाष जी को डराता था। सभी काम करने वाले उन्हें भूतो की कहानियां ही सुनाते थे और सुभाष जी डरते तो थे पर भूतो की कहानियां सुनने के लिए जिद्द करते थे। यह तक की पुस्तक में ये भी लिखा गया है कि वो अकेले कही जाते भी नही थे।उम्र बढ़ने के बाद उनका दर खतम होते चला गया।

SHUBHASH CHANDRA BOSE में शामिल हुए

कांग्रेस ने शामिल होने के बाद सुभाष चंद्र बोस की मुलाकात मोहन दास करमचंद गांधी से हुई। गांधी जी के कहने पर सुभाष जी देशबंधु चितरंजन दास जी के साथ काम किया। 1928 में जब साइमन कमीशन आया तब कांग्रेस ने इसका विरोध किया। उस समय गांधी जी पूर्ण स्वराज की मांग से सहमत नहीं थे, सुभाष जी और जवाहर लाल नेहरू जी को पूर्ण स्वराज की मांग से पीछे हटना मंजूर नहीं था। बाद में यह फैशला किया गया की ब्रिटिश सरकार को डोमिनेंट राज्य के लिए एक साल का वक्त दिया जाए। यदि ब्रिटिश सरकार द्वारा इस मन की पूर्ति नहीं की गई तो कांग्रेस पूर्ण स्वराज की मांग करेगी। ब्रिटिश सरकार ने वही किया जिसका सुभाष जी को अंदाजा था ब्रिटिश ने हर बार की तरह इस बार भी अपनी मनमानी किया और उनकी मांग को पूरा नहीं किया।इसीलिए 1930 में जब कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन जवाहरलाल नेहरू जी की अध्यक्षता में लाहौर में हुआ। लाहौर में यह तय किया गया कि 26 जनवरी का दिन स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

26 जनवरी 1931 को कोलकाता में राष्ट्र ध्वज सुभाष जी के द्वारा फहरा दिया गया। राष्ट्र ध्वज फहराने के बाद सुभाष जी एक विशाल मोर्चे का नेतृत्व कर रहे थे। इस मोर्चे के दौरान पुलिस ने मोर्चे पर लाठी चार्ज कर दिया। सुभाष जी बुरी तरह घायल हो गए थे । घायल होने के बाद पुलिस ने सुभाष जी को जेल में डाल दिया। सुभाष जी के बारे में ये खबर जान कर गांधी जी ने अंग्रेजी सरकार से कई समझौते किए और सभी कैदियों को रिहा करवा लिया । लेकिन अंग्रेज सरकार ने भारत के वीर भगत सिंह जैसे क्रान्तिकारियों को रिहा नही किया। सुभाष जी चाहते थे कि गांधी जी द्वारा किया गया समझोता तोड़ दिया जाए। लेकिन गांधी जी वचन के पक्के थे और वो इस वचन को किसी भी कीमत पर तोड़ नही सकते थे। और इसी बात का फायदा उठा कर अंग्रेजी सरकार ने भगत सिंह और उनकी साथियों को फाशी दे दी। यह खबर पूरे देश के लिए बहुत बुरी थी। कांग्रेस के सभी नेताओ में नाराजगी थी।सुभाष चंद्र बोस को अपने जीवन में 11 बार जेल गए थे।

नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु

सुभाष चंद्र बोस जी की मृत्यु के रहस्य आज तक सुलझा नहीं पाया गया है।ऐसा माना जाता है कि सुभाष जी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को एक जापानी विमान दुर्घटना में हुआ था। अभी तक उस विमान दुर्घटना में सुभाष जी के मृत्यु की पुष्टि नहीं की गई है। कई लोगो का ऐसा मानना है की उस विमान दुर्घटना में सुभाष जी की मृत्यु नहीं हुई थी।
रिटायर्ड मेजर जनरल जी डी बख्शी ने अपने पुस्तक ‘बोस: द इंडियन समुराई’ में लिखा है की सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विमान दुर्घटना में नही हुई थी। उन्होंने इस पुस्तक में ये लिखा है की अंग्रेज नही चाहते थे की दुनिया जाने की सुभाष जी की मृत्यु जेल में अंग्रेजों द्वारा यातना के दौरान हुई। इसीलिए उन्होंने प्लेन क्रैश को उनकी मृत्यु का कारण बताया।
कई ऐसे इतिहास कार भी है जो ये कहते है कि सुभाष जी भारत लौट आई थे और अवध के फैजाबाद में एक अलग नाम (भगवानजी या गुमनामी बाबा) के साथ रहते थे। यह गुमनामी बाबा 1985 तक जीवित रहे। केआई ऐसे थ्योरी भी है जो कहती हैं कि दोनों एक ही व्यक्ति थे।

आशा करते है की इस ब्लॉग में आपको नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी के बारे में कई तथ्य और रहस्य जानने को मिले होंगे।

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